Monday, February 15, 2016
Monday, January 4, 2016
XII के पाठ्यक्रम में एक और विषय- 'समीक्षा'।
इस बार से सीबीएसई ने XII के पाठ्यक्रम में एक और विषय जोड़ दिया है- 'समीक्षा'। नीचे आपकी सुविधा के लिए पद्य और गद्य- दोनों की समीक्षा के दो नमूने दिए जा रहे हैं। कृपया स्वयं पुस्तकें पढ़ें और समीक्षा लिखने का अभ्यास करें ।
पुस्तक-समीक्षा(गद्य)
विविधा : भोजपुरी साहित्य का एक संदर्भ ग्रंथ
समीक्ष्य कृति : विविधा (संपादकीय आलेख संग्रह)
लेखक : पांडेय कपिल
प्रकाशक : भोजपुरी संस्थान, 3/9, इंद्रपुरी, पटना- 800024
प्रथम संस्करण : अक्टूबर, 2011, पृष्ठ संख्या : 482 , मूल्य : बारह सौ रुपये
‘विविधा’ सुप्रसिद्ध आचार्य पांडेय कपिल द्वारा संपादित भोजपुरी पत्रिकाओं के संपादकीय आलेखों का संग्रह है।ये सभी आलेख उनके द्वारा संपादित लोग, उरेह एवं भोजपुरी सम्मेलन पत्रिका (मासिक) के दिसंबर, 2001 तक के अंकों में छप चुके हैं।
इसमें लेखक ने भोजपुरी से जुड़ी हस्तियों को जन्म, मृत्यु या किसी खास अवसर पर जब याद किया है तो जैसे वे सभी परिचयात्मक कोश हो गए हैं। भविष्य में वे सभी उन पर शोध हेतु मानक सामग्री स्रोत हो सकते हैं।इन लेखों में उन्होंने पुराने लेखकों के साथ ही नए लेखकों को भी महत्त्व प्रदान किया है। आचार्य महेंद्र शास्त्री, रघुवंश नारायण सिंह, आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी आदि स्थापित साहित्यकारों के साथ ही शशिभूषण सिंह शशि जैसे नवोदित रचनाकारों को भी उसी सम्मान के साथ याद किया गया है।
इस पुस्तक को 1975 से 2001 तक के 26 वर्षों के भोजपुरी साहित्य एवं संस्कृति की धड़कनों के रूप में भी देखा जा सकता है।
‘भोजपुरी में अराजक स्थिति’ जैसे लेखों से संपादक की चिंता समझ में आती है।इस पुस्तक में भाषा के मानकीकरण पर भी लेखक संवेदनशील है और इस अराजक स्थिति से उबरने में वह कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहता। मानवाधिकार के उल्लंघन पर भी इनकी लेखनी खूब चली है।‘अमानुषिक अपराध : सामाजिक कलंक’ एवं ‘फीजी सरकार के अत्याचार’ इसी तरह के आलेख हैं।
सिलसिलेवार समय की नब्ज टटोलना आसान काम नहीं होता। इसके लिए बहुत जागरूक रहना पड़ता है। अपने संपादकीय में ‘कारगिल’ जैसे राष्ट्रीय चिंता एवं गर्व पर भी लेखक सक्रिय दिखता है।इस तरह के काम हिंदी में जरूर मिल जाएँगे पर मेरी जानकारी में भोजपुरी में यह पहला ग्रंथ है, जिसमें पर्याप्त सामग्री अपने स्तरीय रूप में है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि ‘विविधा’ अपने छिटपुट रूप में भोजपुरी साहित्य का एक संदर्भ ग्रंथ है और भविष्य में शोधार्थी इसका प्रयोग खूब करेंगे।
समीक्षक : ....(परीक्षा में प्रश्नपत्र में निर्देशित नाम या क ख ग)
पुस्तक-समीक्षा((कविता)
पागल
मन फिर बुन रहा सपनों का संसार
समीक्ष्य
कृति : खोलो मन के द्वार
कवि : गोविंद सेन
प्रकाशक
: बोधि प्रकाशन
मूल्य
: 60 रुपये
पिछले कुछ दशकों से हिंदी कविता में दोहे पर बहुत कम कार्य हुआ है। गोविन्द सेन ने अपनी नवीन पुस्तक ‘खोलो मन के द्वार’ के माध्यम से आधुनिक सौन्दर्यबोध को एक नई दिशा दी है।
भारत में अधिकांश बच्चे पढ़ने, खेलने की उम्र में मेहनत मजदूरी करने को मजबूर हैं या उनका बचपन किसी न किसी बोझ से दबा हुआ है। लेखक इस चुप्पी, उदासी और बेचैनी को दूर करने का आह्वान करता है- ‘दुनिया में सबसे बड़ी बचपन की मुस्कान।’
गोविन्द सेन ने आधुनिक सरकार की नब्ज को भी टटोलने की कोशिश की है। सत्ता चाहे किसी की भी हो, हमेशा जनता पिसती है। लेकिन कवि हार नहीं मानता -
पत्थर दिल इंसान ने तोड़े स्वप्न हजार
पागल मन फिर बुन रहा सपनों का संसार।
सत्ता का रंग बदलते ही सबसे पहले सत्ता सुख के आदी मीडिया का भी रुख बदल जाता है। कवि उनके मुनाफे की हवस को नंगा करता है -
बेच रहे हैं सनसनी सारे चैनल आज।
सत्ता वादा करती है और मुकर जाती है। फिर सदा की तरह मनुष्य भगवान के दर पर चला जाता है। यहाँ कवि की चिंता जायज है। वह भगवान से भी गुहार लगाता है -
कठिन दिनों से नित्य ही जूझ रहा इंसान
अच्छे दिन आखिर कहाँ भटके हैं भगवान।
गोविन्द सेन इस दौर के ऐसे कवि हैं जिन्होंने रहीम, कबीर आदि की छंद परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास तो किया ही है, आम आदमी के साथ अपनी चिंता को जोड़कर प्रगतिशीलता को एक नया आयाम देने की पुरजोर कोशिश की है।
समीक्षक : ....(परीक्षा में प्रश्नपत्र में निर्देशित नाम या क ख ग)
Tuesday, December 29, 2015
न्यूज लेटर-1
केंद्रीय विद्यालय, बैरकपुर(थलसेना) का पहला न्यूज लेटर (Volume 1) पढ़ने हेतु
नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें-
News Letter- KV BKP ARMY- Vol 1
नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें-
News Letter- KV BKP ARMY- Vol 1
Sunday, August 16, 2015
व्याकरण के कुछ प्रश्न
बच्चो !
कक्षा XI और XII में व्याकरण के भी कुछ प्रश्न आते हैं। एक-एक कर मैं सबको प्रस्तुत करता जाऊँगा।
सबसे पहले पढ़िए शब्द-विचार
शब्द-विचार
शब्द
वर्णों के सार्थक समूह को, जिसका निश्चित अर्थ होता है, शब्द कहते हैं।
क, ख, ग, घ आदि वर्ण हैं। इन्हीं वर्णों के मेल से शब्द बनते हैं।
शब्द के भेद
शब्द के भेद निम्नलिखित आधार पर किए जाते हैं :
1. अर्थ के आधार पर शब्द के भेद
2. रचना के आधार पर शब्द के भेद
3. प्रयोग की दृष्टि से शब्द के भेद
1. अर्थ के आधार पर शब्द के भेद
अर्थ के आधार पर शब्दों के निम्नलिखित दो भेद होते हैं :
निरर्थक शब्द – जिन शब्दों से कुछ अर्थ नहीं निकलता, उन्हें निरर्थक शब्द कहते हैं।
सार्थक शब्द – जिन शब्दों से कुछ अर्थ निकलते हों, उन्हें सार्थक शब्द कहते हैं।
2. रचना (बनावट) के आधार पर शब्द के भेद
1.रूढ़ शब्द – जिन शब्दों के टुकड़े नहीं किए जा सकते तथा जो शब्द प्रचलित सामान्य अर्थ को सहजत: प्रकट करते हैं, उन्हें रूढ़ शब्द कहते हैं।
2.यौगिक शब्द – जो शब्द दो से अधिक शब्दों से मिलकर बने हों, उन्हें यौगिक शब्द कहते हैं ।
3.योगरूढ़ शब्द – योगरूढ़ शब्द दो से अधिक शब्दों के मेल से बनते हैं, परंतु उनका प्रयोग किसी विशेष अर्थ में ही किया जाता है; जैसे :
· दशानन = दश (दस) + आनन (मुख) अर्थात् दस मुखों वाला, परंतु यह शब्द सामान्य अर्थ में प्रचलित न होकर रावण के लिए प्रयुक्त होता है।
3.उत्पत्ति या स्रोत के आधार पर शब्द के भेद
उत्पत्ति के आधार पर शब्दों के निम्नलिखित चार भेद हैं :
1. तत्सम शब्द – संस्कृत के वे शब्द , जिनका प्रयोग हिंदी भाषा में उनके मूल रूप में ही किया जाता है, तत्सम शब्द कहलाते हैं। जैसे- सूर्य,जल आदि।
2. तद्भव शब्द -संस्कृत से बिगड़कर जो शब्द हिंदी में आए हैं, उन्हें तद्भव शब्द कहते हैं। जैसे- सूरज,साँप,आग आदि।
नीचे अभ्यास के लिए इसी वर्ग के कुछ अन्य शब्द दिए गए हैं :
तत्सम तद्भव
ग्राम गाँव
सत्य सच
चंद्र चाँद
कर्म काम
3. देशज शब्द – जो शब्द किसी भी भाषा से नहीं आए, बल्कि हिंदी में ही बना लिए गए हैं, देशज शब्द कहलाते हैं। जैसे- गाड़ी, पेट आदि।
4. विदेशी शब्द- विदेशी भाषाओं के कुछ शब्द हिंदी में प्रयुक्त होने लगे हैं। इन शब्दों को विदेशी शब्द कहा जाता है। जैसे- गरीब, दुकान आदि।
हिंदी में प्रयोग होने वाले विदेशी शब्द
अंग्रेज़ी – पेन, टिकट, मशीन, बोतल आदि।
अरबी – हासिल, बाज़ार, इमारत, आज़ाद आदि।
कभी-कभी दो भाषाओं से मिलकर भी शब्द बन जाते हैं। जैसे-
रेलगाड़ी = रेल (अंग्रेज़ी) + गाड़ी (हिंदी)
वर्षगाँठ = वर्ष (संस्कृत) + गाँठ (हिंदी
Wednesday, August 5, 2015
हर नई पोस्ट की जानकारी
Follow by Email
के बॉक्स में
अपना Email address लिखिए और submit कर दीजिए। इसके बाद हर नई पोस्ट की
जानकारी आपके Email पर मिलने लगेगी।
Tuesday, August 4, 2015
हिंदी में टाइप करने हेतु
हिंदी में टाइप करने हेतु नीचे दिए गए लिंक पर जाइए
और हिंदी फॉण्ट में जाकर अपने कंप्यूटर के योग्य Indic Input डाउनलोड कीजिए और फिर अपने कंप्यूटर
में इंस्टॉल कर लीजिए.
Indic
Input इंस्टॉल
करने के बाद
Shift+Alt दबाने के बाद Enter दबाइए और अब आपका हिंदी टाइप शुरू।
Sunday, February 22, 2015
प्रमुख अलंकार
परीक्षा निकट है । आपकी सुविधा के लिए कविता के शिल्प सौंदर्य या उसकी भाषिक विशेषताओं की सहायक सामग्री के रूप में प्रमुख अलंकारों का स्वरूप संक्षेप में स्पष्ट कर रहा हूँ ।
डॉ. रामरक्षा मिश्र
- अनुप्रास
जहाँ व्यंजन वर्णों की आवृत्ति के कारण काव्य में चमत्कार
होता है ।
उदाहरण
तरनि तनूजा तट तमाल तरूवर बहु छाए ।
- यमक
जहाँ एक शब्द बार-बार आए किन्तु हर बार उसका अर्थ बदल जाए ।
उदाहरण
तीन बेर खाती थीं वे तीन बेर खाती हैं ।
- उपमा
जब किसी वस्तु या व्यक्ति की विशेषता बताने के लिए उसकी
समानता उस गुण में बढ़ी हुई किसी अन्य वस्तु या व्यक्ति से की जाती है ।
उदाहरण
पीपर पात सरिस मन डोला ।
- उत्प्रेक्षा
जहाँ उपमेय और उपमान की समानता के कारण उपमेय में उपमान की
संभावना हो ।
उदाहरण
मानहुँ मदन दुंदुभी दीन्ही ।
मनसा विस्वविजय चहँ कीन्ही ।
- रूपक
जहाँ उपमेय में उपमान का निषेधरहित
आरोप हो ।
उदाहरण
मन का मनका फेर ।
- अतिशयोक्ति
जहाँ किसी गुण या स्थिति का बढ़ा
चढ़ाकर वर्णन किया जाय ।
उदाहरण
राणा ने सोचा इस पार
तब तक चेतक था उस पार ।
- अन्योक्ति
जहाँ किसी उक्ति के
माध्यम से कोई अन्य बात कही जाय ।
उदाहरण
नहिं पराग नहिं मधुर मधु
नहिं विकास इहि काल ।
अली कली ही सौं बध्यौं
आगे कौन हवाल ।
Subscribe to:
Posts (Atom)